भूली-बिसरी यादें
पढ़ें समझें राय दें अति महत्वपूर्ण - आलोचना जरूर करें।
Friday, October 14, 2011
राही
हम तो निकले थे दूर तलक जाने को,
पर रास्ता खत्म हो गया चलते चलते।
Thursday, October 13, 2011
दुश्वारी
ठंडी सी एक हवा का झौका,
चुभन सी पैदा करता है दिल में,
न जाने क्यों दिल धडकता है जोरो से,
बिना किसी जरुरत के,
ओ भी यू गुजरते है सामने से,
अजनबियों की तरह जैसे,
सूरज ढलता है शाम होते होते ।
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