Tuesday, September 21, 2010

आशा


आशा

नया खेत और बीज नए,
सोचा बोऊंगा मेहनत से,
छलका पसीना पोचा मैंने,
मैले कुचेले तहमत से,

रही मजबूरी उन बीजों की,
जिनको था जमीं पर डाला,
प्यार दिया था अपने से ज्यादा,
अपने तन को मार डाला,

क्योंकि जब उगेगी डाली तब मैं,
अपने तन को सुख पंहुचाउंगा,
यही कह कर रहा बैठा मैं,
कल खेत जोतने जाऊंगा,

हुआ अधेरा रात आई और,
सो गया मैं मेहनत वाला,
नहीं पता मुझे मेरे जीवन में,
आने वाला है दिन काला,

उठा सबेरे बड़ी ख़ुशी से,
मौसम ने है साथ दिया,
लिए बैलों के जोड़ो को,
खेतो को है प्रस्थान किया,

मौसम ने जब बदला रंग,
देख राही परेशान हुआ,
राही लगायी जो भविष्य की आशा,
अब उस का कुछ ज्ञान हुआ,

मौसम बदला बरसा रिमझिम,
दिन आज का बर्बाद हुआ,
पूरे साल राही "आशा" कि,
कम मौसम से में आबाद रहा.

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