धीरे-धीरे सुलगते तेंदू के
पत्ते की तरह
राख में परिवर्तित होकर
बन्द मुट्ठी से
फिसलते रेत की तरह
केवल कुछ धूल बचाकर
हथेली पर रखे बर्फ के
टुकड़े का पानी बनने तक
निकल जाता है वर्तमान
अपने अतीत से मिलने को
यह साल भी हमेशा की तरह
निकल जायेगा हाथ से अतीत बनकर
छोड़ जाएगा कुछ यादें
कुछ बातें, कुछ किस्से
कुछ अनुभव अपनी याद दिलाने को
दीपक पनेरू
दिनाँक-31 दिसम्बर 2018
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