रोते हुए पहाड़ सिसकते हुए लोग,
हँसते हुए हम और देखते हुए लोग,
जो कुछ कर सकते थे कुछ कर न सके,
जिन्होंने किया ओ कुछ था नहीं,
रोते रहे अपने की साथ ले चलो,
हमने कहा देर हो रही है इंतजार करो.......
किसका और कब तक न उन्होंने पूछा न हमने बताया,
आखिर क्यों....??????? ---दीपक पनेरू
NICE POEM SIR
ReplyDeletenice lines....
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